Thursday, April 9, 2009

दिल के रस्ते मैं मैंने टोकर है कहै

तनहाई, तनहाईदिल के रास्ते में कैसी ठोकर मैने खाईटूटे ख्वाब सारे एक मायूसी हैं छाईहर खुशी सो गई, जिंदगी खो गईतुम को जो प्यार किया, मैने तो सजा में पाईतनहाई, तनहाई, मिलों हैं फैली हुई तनहाईख्वाब में देखा था एक आंचल मैने अपने हाथों मेंअब टूटें सपनों के शीशे चुभते हैं इन आखों मेंकल कोई था यही, अब कोई भी नहींबन के नागिन जैसे हैं सांसों में लहराईतनहाई, तनहाई, पलकों पे कितने आंसू हैं लाईक्यों ऐसी उम्मीद की मैने जो ऐसे नाकाम हुईदूर बनाई थी मंजिल तो रस्ते में ही शाम हुईअब कहा जाऊँ मैं, किसको समझाऊँ मैंक्या मैने चाहा था और क्यों किस्मत में आईतनहाई, तनहाई, जैसे अंधेरों की हो गहराई

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