Monday, July 7, 2008
constration
एकाग्रता या तन्मयता से कार्य करते समय पलकें कम झपकती हैं। इस तरह कार्य के दौरान एकाग्रता का स्पष्ट आभास आंखों के खुलने व बंद होने की गति से सरलतापूर्वक हो जाता है। उदाहरण के तौर पर जब संगीतकार नई धुन की रचना में लीन होता है, चित्रकार चित्र बनाता है, साहित्यकार अपने विचारों की दुनिया में होता है या कवि जब अपनी कल्पना की दुनिया में खोया होता है तो उसकी पलकें कम उठती-गिरती हैं। यह उनके एकाग्रचित्त होने का द्योतक है। जबकि मानसिक उलझन के कारण तनावग्रस्त व्यक्ति की पलकें ज्यादा झपकती हैं। आंखों के खुलने व बंद होने की तीव्र रफ्तार व्यक्ति की परेशानी, दुविधा, असमंजस या किंकर्तव्य विमूढ होने आदि दशाओं की तरफ इंगित करती है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
1 comment:
bahut badhiyaa......
saral dhang se jise kaha ja sake,wahi akaagrata ka parichay hai
Post a Comment